June 14, 2024

भ्रष्टाचार कथा अनंता : दस साल में बीस लाख करोड़!

(टिप्पणी : संजय पराते)
भाजपा का चाल, चेहरा और चरित्र स्पष्ट है। विश्व की कथित रूप से सबसे बड़ी पार्टी और उसकी मातृ संस्था आरएसएस वास्तव में विश्व की सबसे अमीर पार्टी और संस्था है, तो यह अब कोई रहस्य नहीं है। यह अमीरी इस पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम जनता के दान पर नहीं, बल्कि आम जनता और देश के संसाधनों की लूट पर टिकी हुई है। इस लूट से कॉरपोरेट, विशेषकर मोदी के प्रिय पात्र अडानी और अंबानी, मालामाल हुए हैं। इतने मालामाल हुए हैं कि इन दस सालों में दुनिया के सबसे बड़े धन पिशाचों की लाइन में खड़े हो गए हैं, तो उन्हें उपकृत करने वाला संघ-भाजपा भी दुनिया की सबसे अमीर संस्था और राजनैतिक दल बन गए हैं। एक गरीब देश की इतनी बेरहम और बेशर्म लूट शायद अंग्रेजों के समय भी न हुई हो।
वेबसाइट corruptmodi.com ने पिछले दस सालों में केंद्र सरकार और राज्यों में भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए विभिन्न घपले-घोटालों, अनियमितताओं और गड़बड़ियों के जो विवरण एकत्रित किए हैं, उन्हें ही जोड़ा जाएं, तो ये घपले-घोटाले-भ्रष्टाचार मोटे तौर पर 10 लाख करोड़ रुपए के होते हैं। पिछले 10 सालों में ऐसा कोई माह नहीं था, जब भाजपा राज का कोई भ्रष्टाचार उजागर नहीं हुआ हो और ऐसा कोई साल नहीं था, जब देश और यहां की जनता को एक लाख करोड़ रुपयों का चूना न लगा हो।
इस वेबसाइट द्वारा जिन घपलों-घोटालों को संकलित किया गया है, उन घोटालों में केंद्र और विभिन्न राज्यों में संघ-भाजपा सरकार की सीधी मिलीभगत रही है। ये घोटाले राष्ट्रीय मीडिया में बड़े पैमाने पर उछले हैं, इसके बावजूद किसी भी मामले में किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। इसके अलावा, ऐसे अनगिनत मामले हैं, जिन्हें गोदी मीडिया द्वारा शातिराना तरीके से दबा दिया गया है और “विपक्ष के अनर्गल आरोप मात्र” के रूप में प्रचारित किया गया है। वेबसाइट द्वारा संकलित घोटाले भ्रष्टाचार रूपी हिमशैल का वह ऊपरी हिस्सा है, जो दिखाई देता है। हिमशैल का निचला हिस्सा तो ‘भ्रष्टाचार कथा अनंता’ है। हम कितना ही उदार हो जाएं, यह अदृश्य राशि भी दृश्य राशि से ज्यादा ही होगी। इस प्रकार, भाजपा की भ्रष्टाचार कथा कम से कम 20 लाख करोड़ रुपयों के घपले-घोटालों की कथा है।
2 के बाद 13 शून्य लगाने से बनी संख्या 20 लाख करोड़  रुपए कितने होते हैं? इसे जानने के लिए हम अपनी अर्थव्यवस्था और बजट का सहारा ले सकते हैं। यह इतनी बड़ी राशि है कि वर्ष 2023-24 के कुल बजट व्यय का लगभग आधा और वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट के पूंजीगत व्यय का लगभग दुगुना है। यह राशि हमारे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6% से ज्यादा है। यह इतनी बड़ी राशि है कि हमारे 23 सालों का मनरेगा बजट या स्वास्थ्य बजट या कृषि कल्याण मंत्रालय का 16 सालों का बजट इसमें समा जाएं। यह इतनी बड़ी राशि है कि इससे 172 सालों तक मध्यान्ह भोजन योजना या 94 सालों तक आंगनबाड़ियों के जरिए बाल विकास योजनाएं चलाई जा सकती है। इस राशि से देश के 11 लाख सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को आदर्श स्कूलों के रूप में विकसित करके अगले 18 सालों तक गुणवत्तापूर्ण स्कूली और उच्च शिक्षा का इंतजाम किया जा सकता था। इस राशि से केंद्र सरकार अगले 10 सालों तक गरीबों के लिए खाद्य सब्सिडी का इंतजाम कर सकती थी। इस राशि से अगले 37 सालों तक ग्रामीण आवास की जरूरतों को पूरा किया जा सकता था। इस राशि से अगले 3-4 सालों तक 5000 रूपये प्रति माह के हिसाब से देश के 10 करोड़ नौजवान बेरोजगारों और वयोवृद्धों को बेरोजगारी भत्ता या पेंशन दी जा सकती थी। यह राशि देश के किसानों को दी जा रही तथाकथित सम्मान निधि के 33 सालों के बजट के बराबर है। यह राशि देश के सबसे निचले स्तर पर जिंदा रहने की जद्दोजहद कर रहे 28 करोड़ लोगों की सम्मिलित आय के बराबर है।
इन तथ्यों के सहारे समझा जा सकता है कि ‘विकसित भारत’ की जुमलेबाजी करने वाली भाजपा द्वारा देश को इन दस सालों में कितने बड़े पैमाने पर लूटा गया है। वास्तव में भाजपा ने आम जनता के उस सपने के साथ दगाबाजी की है, जो भारत को मानव विकास सूचकांक के पैमाने पर एक विकसित भारत के रूप में देखना चाहती है। भाजपा इन लोकसभा चुनावों में ‘कॉरपोरेट भारत’ और देश के संसाधनों की कॉरपोरेट लूट के लिए जनादेश चाहती है, जिसके जरिए वह अगले 23 सालों में अपने लिए 50 लाख करोड़ रुपए और लूट सके। लेकिन आम जनता भाजपा को इसका मौका नहीं देने वाली है।
यही कारण है कि इन चुनावों के अंतिम दौर तक उसने अपनी 10 साल की उपलब्धियों पर कोई बात नहीं की है। पिछले दो चुनावों में उसने जितने भी वादे किए थे, आज वह इन वादों पर खामोश है। उसके एजेंडे में वे मुद्दे हैं, जो लोगों को जाति, धर्म और नफरत के आधार पर बांट सके। प्रधानमंत्री के मुंह से मछली, मटन, मुर्गा, मंदिर, मुस्लिम, मुजरा जैसे शब्दों की बौछार हो रही है और आम जनता उनकी हो रही जगहंसाई देख रही है। अब यह स्पष्ट है कि आजादी के 75 सालों बाद भी संघी गिरोह संविधान में निहित सामाजिक न्याय, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और भाईचारा जैसे मूल्यों को आत्मसात नहीं कर पाया है। आज भी वह मनु की उस वर्णवादी व्यवस्था को आगे बढ़ाना चाहती है, जिसकी पैरोकारी वह आजादी से पहले करती थी। भाजपा और संघी गिरोह का सपना एक विकसित और वैज्ञानिक दुनिया में ‘हिन्दू राष्ट्र’ के नाम पर एक”अविकसित और मूढ़ भारत” बनाने का सपना है। भारत की जनता निर्णायक रूप से इस संघी सपने को ठुकराने और एक शोषण विहीन और समानता पर आधारित भारत के निर्माण के संघर्ष को बढ़ाने के लिए तैयार है। 4 जून को देश की जनता इसी की घोषणा करने जा रही है।
(टिप्पणीकार अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *